निर्भया को देर से न सही पर इंसाफ मिला। अच्छा होता अगर उन दरिन्दगों को निर्भया के इच्छानुसार फांसी के बजाय जिन्दा जला दिया जाता। 
सलाम है इस माँ को, जो इतना पीड़ादायक घटना के बावजूद उन्हें इंसाफ दिलाने लगातार संघर्ष करती रही। वास्तव में  बार-बार गड़े मुर्दे उखाड़ना असहनीय पल होता है। इस घटना के बारे में जानकर हर कोई सिहर उठता है।

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