मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था | मेगस्थनीज का इंडिका | पीडीएफ डाउनलोड


मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था: मेगस्थनीज के अनुसार मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था कैसी थी? स्पष्ट कीजिए।
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मेगस्थनीज जो कि सिकंदर का सेनापति सेल्यूकस का राजदूत था, जिन्हें सेल्यूकस ने चंद्रगुप्त मौर्य के राजदरबार में भेजा था। मेगस्थनीज मौर्य के साम्राज्य में कई वर्षों तक रहा, इस दौरान उन्होंने भारत के विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण कर यहां के जनता, प्रशासनिक व्यवस्था, जलवायु, पर्यावरण, खनिज आदि के बारे में अपनी पुस्तक 'इंडिका' में वर्णन किया है।

मेगस्थनीज द्वारा रचित पुस्तक इंडिका का मूल रूप नष्ट हो चुका है लेकिन यहां के एरियन व डायोयोडोरस समुदाय के लेखों में इंडिका का अनुवादित रूप के माध्यम से मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था के बारे में काफी जानकारी मिल जाती है।

मेगस्थनीज के इंडिका में मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था का उल्लेख कुछ इस प्रकार है-

मौर्य साम्राज्य का केंद्रीय प्रशासन

मौर्य साम्राज्य में केंद्रीय प्रशासन का मुखिया राजा होता था। राजा को सलाह देने व उनकी मदद करने के लिए मंत्रिमंडल का गठन किया जाता था। राजा के मंत्रिमंडल में मंत्रियों की संख्या कितनी होती थी इस बारे में स्पष्ट उल्लेख नहीं है।

राजा अपने राज्य में कई गुप्तचरों की नियुक्ति करते थे जो राज्य की गुप्त जानकारियां केंद्रीय प्रशासन को देते थे। मेगस्थनीज इन गुप्तचरों को पर्यवेक्षक कहते हैं। ये पर्यवेक्षक अपने अधीन सहायक पर्यवेक्षक रखते थे।

मौर्य साम्राज्य का सैन्य प्रशासन

मेगस्थनीज के अनुसार राज्य की सुरक्षा के लिए सेना बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। मौर्य साम्राज्य में छह लाख सेनानी थे जो सैन्य कार्यालय द्वारा नियंत्रित होते थे। इस कार्यालय में 30 सदस्य थे जो 6 समिति में विभक्त थे। प्रत्येक समिति में 5 सदस्य होते थे, प्रत्येक समिति को भिन्न-भिन्न जिम्मेदारियां जैसे- हाथी, रथ, नाव, पैदल व घुड़सवार आदि का संचालन अलग-अलग समितियां करती थी।

मौर्य साम्राज्य का राजस्व प्रशासन

मौर्य साम्राज्य के राजस्व प्रशासन का नियंत्रण केन्द्रीय कार्यकारिणी द्वारा राजस्व विभाग बनाकर किया जाता था. राजस्व विभाग में कई कर्मचारी कार्यरत थे जो विभिन्न पद के थे. जिनमें से सन्निधाता और समाहर्ता का पद महत्वपूर्ण होता था.

मौर्य साम्राज्य में सन्निधाता खजांची के नाम से जाने जाते थे. सन्निधाता का कार्य शाही खजाने के देखरेख और भण्डारण, राज्य के आय-व्यय का विवरण आदि का देखभाल करना होता था. इसी प्रकार समाहर्ता का कार्य विभिन्न राजस्व आय के स्रोतों जैसे - सड़क, भूमि, खदान, जंगल और सड़क आदि से प्राप्त राजस्व का हिसाब रखना होता था. 

मौर्य साम्राज्य का स्थानीय प्रशासन: 

राज्य के राजधानी में नगर पालिका स्थित  होती थी, जो स्थानीय प्रशासन को नियंत्रित करता था। मेगस्थनीज नगर पालिका के अधिकारियों को एस्टनोमोई कहते हैं। स्थानीय प्रशासन के ऊपर बहुत जिम्मेदारियां होती थी।

स्थानीय प्रशासन को नियंत्रित करने के लिए 30 सदस्य होते थे जो 6 समितियों में बांटे गए थे, प्रत्येक में 5 सदस्य होते थे, इन समितियों का काम इस प्रकार था -
  • पहली समिति औद्योगिक कला से संबंधी जिम्मेदारियां संभालती थी।
  • दूसरी समिति विदेशी यात्रियों का मेहमान नवाजी व उनका आवभगत कर उनका ध्यान रखती थी व उनके हर एक हरकतों पर नजर रखती थी तथा इसकी सूचना राजा को देती थी।
  • तीसरी समिति जन्म व मृत्यु पंजीयन का निर्वहन करती थी।
  • चौथी समिति का कार्य वाणिज्य एवं व्यापार का कार्यान्वयन करना था।
  • पांचवी समिति उत्पादित सामानों पर नियंत्रण करती थी।
  • छठी समिति कर वसूलती थी।

मौर्य साम्राज्य में समाज तथा लोग: 

मेगस्थनीज ने मौर्यकालीन समाज को उनके कार्यों व धंधा के आधार पर 7 वर्गों में बांटा है, जो इस प्रकार है -
  • पहले वर्ग में दार्शनिक समुदाय को रखे हैं जिनमें ब्राम्हण और साधु संत भी आते हैं।
  • दूसरे वर्ग में किसानों को रखे हैं जिनकी संख्या राज्य में सर्वाधिक थी।
  • तीसरे वर्ग में गड़रियों और आखेटकों को रखे हैं।
  • चौथे वर्ग में शिल्पकार हैं जो राजा के समक्ष सम्माननीय होते हैं व उन्हें कर देने से मुक्त रखा गया है।
  • पांचवे वर्ग सैनिकों का था।
  • छठे और सातवें वर्ग में पदाधिकारियों को रखा है।

मेगस्थनीज के अनुसार मौर्यकालीन जनता ईमानदार थे, इसकी असल वजह कठोर कानून है। झूठ बोलने व गलत सबूत पेश करने पर अंग भंग कर दिया जाता था। शिल्पकारों को प्रताड़ित करने पर मृत्यु दंड का प्रावधान था। शारीरिक कष्ट देने पर अपराधी के उसी अंग को भंग कर दिया जाता था, जिस अंग को वह कष्ट दिया है अथवा आहत किया है।

साम्राज्य में भरपूर शांति व्यवस्था थी, इसका कारण जलवायु भूमि वह पर्याप्त संसाधन का उपलब्ध होना है। यहां के लोग अल्पव्ययी थे, केवल प्रतिष्ठित यज्ञ के समय ही मदिरा सेवन करते थे।

मेगस्थनीज के अनुसार यहां के सभी लोग स्वतंत्र थे और यहां दास प्रथा अथवा दास विद्यमान नहीं होते थे। शायद यूरोपियन दास और यहां के दास में दिखावटी फर्क होने की वजह से मेगस्थनीज को धोखा हुआ होगा।

निष्कर्षतः मेगस्थनीज के इंडिका के अनुसार मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था बेहतर थी।

मौर्य साम्राज्य से सम्बंधित महत्वपूर्ण सवाल जवाब

Mauryan Empire QnA

चंद्रगुप्त मौर्य का साम्राज्य उत्तर पश्चिम में कहां तक फैला था?

चंद्रगुप्त मौर्य का साम्राज्य उत्तर पश्चिम में ईरान की सीमा तक फैला था. वास्तव में मौर्य साम्राज्य का क्षेत्र बहुत अधिक विस्तृत था, जो कि उत्तर पश्चिम में ईरान की सीमा, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और कर्नाटक तक फैला हुआ था.

मौर्य साम्राज्य के अवसान के बाद उसकी जगह किसने ली?

मौर्य साम्राज्य के अवसान के बाद उसकी जगह पुष्यमित्र शुंग ने ली. दरअसल पुष्पमित्र शुंग मौर्य साम्राज्य के अंतिम शासक वृह्दत्त का सेनापति था, जिन्होंने वृह्दत्त की हत्या कर और शुंग वंश का स्थापना किया. शुंग वंश का कार्यकाल 144 ईसा पूर्व से 75 ईसा पूर्व तक माना जाता है.

अशोक मौर्य साम्राज्य का उत्तराधिकारी कब बना था?

अशोक मौर्य साम्राज्य का उत्तराधिकारी 268 ईसा पूर्व में अपने भाइयों को हराकर राज सिंहासन पर बैठा लेकिन 273 में वास्तविक रूप से पद ग्रहण किया.

मौर्य साम्राज्य किसके काल मे कर्नाटक मे फैला?

मौर्य साम्राज्य चन्द्रगुप्त मौर्य के शासन काल मे कर्नाटक मे फैला.

चंद्रगुप्त मौर्य के विशाल साम्राज्य में कौन से विभाग शामिल थे?

चंद्रगुप्त मौर्य के साम्राज्य में शामिल विभाग -
  • सैन्य विभाग
  • जासूसी विभाग
  • राजस्व विभाग
  • न्यायिक विभाग
  • पुलिस विभाग
  • शिल्प और उद्योग विभाग

उपरोक्त लेख मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था | नीचे दिए लिंक से पीडीएफ डाउनलोड करें. 

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