पदार्थों का पृथक्करण की विधियाँ | एनसीईआरटी विज्ञान

हमें अपनी दिनचर्या में पदार्थों का पृथक्करण की बहुत आवश्यकता पड़ती है, यह पदार्थों को शुद्ध करने की एक क्रिया है. वे सभी कार्य जिनमें एक पदार्थ से किसी अन्य पदार्थ को अलग किया जाता है पृथक्करण कहलाता है.


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अगर हमारे सामान्य जीवन से कल्पना करें तो हम रोजाना अनेक बार पदार्थों का पृथक्करण का उपयोग कर लेते हैं, जैसे - छन्नी की सहायता से चाय व चाय पत्ती को अलग करना, सब्जी से मिर्च व नापसंद चीजों को निकालना, पुस्तक वार्ड से पुस्तक का चयन करना, चावल पकाने के बाद बर्तन से पके हुए चावल को अलग करना आदि और भी अनेक कार्य पृथक्करण से सम्बंधित है.


वस्तुओं का पृथक्करण विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है, हालाँकि सामान्यतः उद्देश पदार्थ से अशुद्धता हटाना होता है. अगर पदार्थ में मिले हुए कण अथवा पदार्थ छोटे आकार के हो तो उसे आसानी से हाथ से बिनकर अलग किया जा सकता है,


परन्तु जरा सोचिये अगर बहुत सारे धान-गेंहू-बाजरा-सोयाबीन-सरसों आदि अनाजों में मौजूद भूंसे व कंकडों को हाथ से अलग करने के लिए कहा जाये तो क्या यह मुमकिन होगा, नहीं न? इसलिए पदार्थों की मात्रा, आकार और प्रकार के हिसाब से उनके पृथक्करण की विधियाँ होती हैं, जिन्हें हम नीचे लेख में पढेंगे.


पदार्थों का पृथक्करण की विधियाँ

प्रतियोगी परीक्षाओं में पदार्थों का पृथक्करण की विधियों से भी सवाल बनते हैं. यहाँ मैं मिश्रण के घटकों को पृथक करने की उन्हीं महत्वपूर्ण विधियों का उल्लेख करूंगा जो प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से महत्ववपूर्ण है. एनसीईआरटी कक्षा 6वीं के विज्ञान में यह अध्याय दिया गया है. पदार्थों का पृथक्करण की अनेक विधियाँ हैं जो निम्नलिखित है.



निष्पावन

हवा के माध्यम से किसी हल्के पदार्थों को पृथक करने की प्रक्रम को निष्पावन कहते है. जैसा कि इसके नाम से स्पष्ट है कि निष्पावन की प्रक्रिया पवन यानि हवा की उपस्थिति में हो सकती है.


आमतौर पर निष्पावन विधि का प्रयोग भूंसे तथा सूखी डंडियों को अनाज से अलग करने के लिए किया जाता है. इसमें व्यक्ति मिश्रित अनाज को किसी पात्र में लेकर हवा के अनुकूल दिशा में खड़े होकर पात्र से अनाज गिराया जाता है, जिससे हवा के कारण अनाज और उसमें मौजूद भूंसे अलग हो जाते हैं.


यह विधि ऊपरी जगह जैसे छत, ढलान वाली जगह आदि में सही कार्य करती है. वैसे आजकल पंखों का उपयोग कर निष्पावन विधि का सकुशल उपयोग किया जाता है.


थ्रेसिंग

थ्रेसिंग पृथक्करण विधि का उपयोग अनाज को पौधों से अलग करने व भूंसे, मिटटी और कंकडों को पृथक करने के लिए किया जाता है. इसमें हवा की आवश्यकता नहीं होती बल्कि एक जगह अनाज होकर अनाज के पौधों के बंडलों को जमीन पर पीटा जाता है. आजकल इस कार्य के लिए थ्रेसिंग मशीन का व्यापक रूप से उपयोग किया है.


चालन

जिस भी पृथक्करण विधि में चन्नी/छन्नी का उपयोग एक पदार्थ को दूसरे पदार्थ से पृथक करने के लिए किया जाता है उसे चालन विधि कहते है. चालन विधि में छन्नी की मदद से पदार्थ से हानिकारक पदार्थों को अलग किया जाता है. जैसे - आटे से कंकड़/कीड़ें/अपशिष्ट अलग करना, रेत से बारीक़ व बड़े कणों को अलग करना आदि.


वाष्पन

आप जानते होंगे कि पानी गर्म होकर वाष्प बनकर हवा में उड़ जाती है. तरल पदार्थों को गर्म करके वाष्प में बदलने की क्रिया को वाष्पन कहते हैं. सुबह-सुबह तालाब के जल से वाष्प निकलना, गर्म पानी का वाष्प बनना वाष्पन का उदाहरण है.नाभिकीय रिएक्टरों में वाष्पन की प्रक्रिया से ही बिजली उत्पन्न की जाती है.


संघनन

खाना बनाते समय अगर प्लेट या ढक्कन को चूल्हे पर रखे बर्तन के ऊपर ढंकते हैं तो कुछ समय बाद उस ढक्कन में पानी जमा हो जाता है. इस प्रकार जलवाष्प का जल में बदलना संघनन कहलाता है. बादलों में संघनन की प्रक्रिया के फलस्वरूप बारिश होती है. 


अवसादन

इसे एक उदाहरण से समझने का प्रयास करते हैं. मिट्टी, धुलकण युक्त अनाज लीजिये और उसे किसी पात्र में रख दीजिये. अब इस पात्र में पानी डालिए और पात्र को हिलाइए व कुछ समय तक ऐसे ही रहने दीजिये. कुछ समय बाद पात्र का अवलोकन कीजिये.


आप क्या देखते हैं? मिट्टी, धूलकण हल्के व घुलनशील होने की वजह से पानी में घुल जाते हैं व तैरने लगते हैं तथा अनाज भारी होने की वजह से पात्र के नीचले हिस्से में बैठ जाते हैं.


जब दो मिश्रित पदार्थों को जल में मिलाने पर हल्के पदार्थों का जल में तैरना व भारी पदार्थों का जल के नीचे बैठ जाने की प्रक्रिया को अवसादन कहते हैं. अवसादन की प्रक्रिया में जल की आवश्यकता होती है.


निस्तारण

अब जल के नीचे बैठे भारी पदार्थ अथवा अनाज को अलग करने के लिए पात्र को तिरछा करके मिट्टी, धूलकणयुक्त जल को निकाल दें, जिसके बाद आप देखेंगे कि पात्र में केवल अनाज ही शेष है. जल में घुली हल्के अशुद्धियों को अलग करने की प्रक्रिया को निस्तारण कहते हैं.


ध्यातव्य है कि निस्तारण की प्रक्रिया के लिए जल का होना आवश्यक नहीं है. दो ता तीन पदार्थों के मिश्रण जो अधिक मात्रा में उपलब्ध है, को एक साथ अलग करने की प्रक्रिया भी निस्तारण हो सकती है.


निस्यंदन

हम देखते हैं कि निस्तारण विधि से प्राप्त अनाज में अभी भी बारीक धुलकण मौजूद है. इन धूलकणों को अलग करने के लिए एक ऐसी विधि का प्रयोग किया जाता है, जिससे पदार्थ से बारीक अशुद्धियाँ को निकाला जा सके. इस विधि को निस्यंदन यानि फिल्कर करना कहते हैं.


ओटाई

रुई के गोलक से रुई और बीज को अलग की प्रक्रिया को ओटाई कहते हैं. कम मात्रा के गोलक के लिए ओटाई का कार्य हाथ से किया जाता है. अगर गोलक अधिक मात्रा में हो तो ओटाई मशीन का उपयोग किया है.


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